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✨ महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी।
इसका व्रत/पूजन उसी रात होता है और 16 फरवरी 2026 को इसका पारण (उपवास समाप्त) भी किया जाता है।
➡️ तिथि का विवरण:
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम से शुरू होगी और 16 फरवरी तक चलेगी।
प्रमुख पूजा और ध्यान रात 11:30 बजे से लगभग 12:30 बजे तक (निशिता काल) किया जाता है क्योंकि वह समय सबसे शुभ माना जाता है।
महाशिवरात्रि को भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़ा और पवित्र हिंदू त्यौहार माना जाता है। यह रात भक्तों के लिए आत्म-चिंतन, तपस्या और शिवभक्ति की प्रतीक रात है। इसके होने के कई धार्मिक अर्थ और पुराणिक कथाएँ हैं:
महाशिवरात्रि को उस रात माना जाता है जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह (शिव-पार्वती योग) हुआ था।
इसलिए यह दिन विवाह, संबंधों की दृढ़ता, प्रेम और संतुलन का प्रतीक भी माना जाता है।
पुराणों के अनुसार, संसार को बचाने के लिए भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय निकले जहरीले विष (हलाहल) को पिया था।
इस कारण उनका गला नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। यह त्यौहार हमारे त्याग, साहस और भक्ति की याद दिलाता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार इसी रात भगवान शिव ने विश्व तांडव किया था — यह नृत्य सृजन, पालन और संहार का प्रतीक है।
इसलिए यह रात आध्यात्मिक ऊर्जा का उच्चतम समय माना जाता है।
महाशिवरात्रि की रात परंपरागत रूप से जागरण (रातभर जागते रहना), मंत्र जप, शिवलिंग पर अभिषेक, ध्यान और ध्यान-भाव से भक्ति का समय है।
धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस रात शिव की कृपा विशेष रूप से मिलती है, और आत्मशुद्धि व मन की शांति प्राप्त होती है।
भगवान शिव के भक्त इस दिन आम तौर पर:
🙏 सुबह-सुबह शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद अर्पित करते हैं
🕉️ बेलपत्र, भांग, धतूरा, फूल आदि चढ़ाते हैं
📿 ॐ नमः शिवाय का जाप रातभर करते हैं
🌺 रुद्राभिषेक और आरती करते हैं
🥣 कई लोग व्रत (उपवास) भी रखते हैं और अगली सुबह पारण करते हैं
महाशिवरात्रि हमें यह सिखाती है:
🔥 अहंकार का त्याग कर आत्म-चिन्तन
🔥 आध्यात्मिक उन्नति और अंतर्मुख हो जाना
🔥 भक्ति, संयम और शांति की ओर अग्रसर होना
🔥 शिव की असीम कृपा से जीवन की उन्नति और बाधाओं का